*पीएमजीएसवाई की 15 प्रतिशत सड़कों को वेस्ट प्लास्टिक से बनाया जाए-रोहित कुमार*

रिपोर्ट - कैलाश विश्वकर्मा

प्रयागराज

बाढ़ तथा भारी वर्षा से प्रभावित सड़कों को आपदा राहत कोष से मरम्मत कराने का निर्देश

प्राथमिक विद्यालयों, आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पेड़-पौधे लगाएं जाए
संयुकत सचिव ने रूर्बन मिषन के कार्यों को समय से पूरा करने का दिया निर्देष

04 अक्टूबर, 2019 प्रयागराज।
ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव रोहित कुमार शुक्रवार को सरकिट हाउस के सभागार में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन तथा सांसद आदर्श ग्राम योजना की समीक्षा की। उन्होंने पीएमजीएसवाई-1 और 2 के तहत शेष कार्यों को प्रत्येक दशा में मार्च, 2020 तक पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ तथा भारी वर्षा से प्रभावित सड़कों को आपदा राहत कोष के माध्यम से तत्काल मरम्मत करायें। उन्हांेने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अन्तर्गत निर्मित प्रदेश की सभी सड़कों का अनुरक्षण प्राथमिकता पर करते हुए उसका भौतिक सत्यापन भी सुनिश्चित करें। उन्होंने पीएमजीएसवाई की 15 प्रतिशत सड़कों को वेस्ट प्लास्टिक से बनाने का निर्देश दिया। संयुक्त सचिव ने कहा कि नयी तकनीक से सड़क निर्माण करते हुए किसी एक ही तकनीक पर निर्भर न रहें बल्कि सभी तकनीकों का प्रयोग करें।
संयुक्त सचिव ने कहा कि पीएमजीएसवाई-3 का कार्य नवम्बर से प्रारम्भ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जियो टैगिंग द्वारा दर्ज परिसम्पत्तियों को मिलने वाले अंकों के आधार पर ही सड़कों को निर्माण हेतु चुना जाएगा। उन्होंने जियो टैगिंग का कार्य पूरी सुचिता के साथ करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जियो टैगिंग होने के उपरान्त सभी सड़कें आॅन लाॅइन हो जायेंगी।
उन्हांेने बताया कि पीएमजीएसवाई-3 में मेंटेनेंश कार्य के लिए राज्य सरकार से एमओयू हस्ताक्षर होगा। उन्होंने बताया पीएमजीएसवाई-3 के तहत बनने वाली सड़कों के किनारे वृक्षारोपण अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण का कार्य मनरेगा और अन्य योजनाओं के तहत होगा। उन्होंने कहा कि अधिकारी इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी क्षेत्र के लोग पीएमजीएसवाई-3 की सुविधा से वंचित न रहें। उन्होंने कहा कि सरकार का विशेष ध्यान है कि ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा सड़कों का निर्माण हो ताकि वहां लोग चिकित्सा, शिक्षा व अन्य सुविधाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ ले सकें। उन्हांेने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में छात्रों, किसानों और मरीजों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है।
रूर्बन मिशन की समीक्षा करते हुए संयुक्त सचिव ने कहा कि जिन क्लस्टरों का डीपीआर अभी तक नहीं तैयार हुआ है उन सभी का डीपीआर नवम्बर, 2019 के पहले हर हाल में पूर्ण करा लें। उन्होंने रूर्बन मिशन के पहले चरण हेतु निर्धारित समय सीमा मार्च, 2020 से पहले हर हाल में शेष कार्य को पूर्ण करने का निर्देश दिया। उन्होंने डीपीआर में 50 प्रतिशत से अधिक वैरिएशन होने पर कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया। श्री कुमार ने क्लस्टरों की प्रगति रिपोर्ट पर सन्तोष व्यक्त किया।
संयुक्त सचिव ने मनरेगा आयुक्त के प्रस्ताव क्लस्टर को नोटिफाइड क्षेत्र घोषित करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे विकास को गति मिलेगी और लोगांे को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। प्राथमिक विद्यालयों, आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पेड़-पौधे लगाएं जाएं, जिससे एक ग्रीन बेल्ट तैयार हो और हमारा पर्यावरण स्वच्छ हो सके। संयुक्त सचिव ने सीआईबीएस डिजाइन पहल की समीक्षा करते हुए कहा कि यह स्कीम रोजगार परक है इसे और बढ़ाने की जरूरत है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सके।
समीक्षा बैठक में मनरेगा के आयुक्त योगेश कुमार, उ0प्र0 ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुजीत कुमार, मुख्य विकास अधिकारी प्रयागराज अरविन्द कुमार सिंह, मुख्य अभियन्ता यूपीआरआरडीए सुधांशु कुमार सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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