पहुंच और रसूख के आगे दब गई रिपोर्ट
✍मोहित दुबे की रिपोर्ट
फतेहपुर। पहुंच हो तो बड़ा से बड़ा जुर्म माफ हो सकता है। यह कहीं सटीक बैठे या न बैठे, लेकिन विकास क्षेत्र तेलीयानी की ग्रामसभा कोराई में पूरी तरह फिट बैठ रहा है। बानगी के तौर पर ब्लॉक तेलियानी की कोराई गांव में पंकज पुत्र स्व शिवलाल का कहना है की उसका मुख्यमंत्री आवास योजना सन 2018-19 की सूची में नाम था। उस सूची में 11 पात्रों को सूची में दिखा दिया गया। परंतु ग्रामप्रधान ने पंकज को आवास देने से मना कर दिया। पंकज ने प्रधान और सचिव पर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र के माध्यम से शिकायत की। उसके बावजूद भी अभी तक कुछ नहीं किया गया। ग्राम प्रधान व पंचायत सेक्रेटरी की साठगांठ से यहां विकास योजनाएं फेल हो रही हैं। भ्रष्टाचार की परत खुलने के बाद भी 'पहुंच' और 'रसूखदार' ग्राम विकास अधिकारी पर कार्रवाई की हिम्मत अधिकारी नहीं जुटा पा रहे हैं। इंदिरा व लोहिया आवास के आवंटन में जमकर खेल किया गया। शौचालय निर्माण में भी धांधली बरती गई। अपात्रों को बांटे गए आवास की पुष्टि भी हुई। जांच रिपोर्ट सीडीओ आफिस तक पहुंची भी, लेकिन पहुंच वाले वीडीओ पर कार्रवाई के बजाय जांच रिपोर्ट को ही दबा दी गई।
पंचायत सचिव व पंचायत मित्र तथा ग्रामप्रधान जालसाजी कर अपने चहेते लोगों को आवास शौचालय नरेगा में बिना काम किए बिना पैसा तथा पात्र लाभार्थियों की सुविधाओं को डकार रहे हैं। शिकायत के बाद भी अधिकारी इस मामले में मौन साधे हुए हैं। इस ग्राम पंचायत को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत शौचालय दिए गए हैं। उनमे से कूछ पुरानी शौचालय को रिपेयरिंग करके नया बनाकर उसके पैसा का बंटाधार किया जा रहा है 2 वर्ष से अधूरे पड़े शौचालय का अभी तक नहीं हुआ निर्माण दूसरी किस्त ही लाभार्थियों को नहीं मिल पा रही है।
बताते चले की ब्लॉक तेलीयानी की ग्रामसभा कोराई में शौचालय पात्रता के आधार पर नहीं चेहरा देख कर दिया जा रहा है। उनमे से कई शौचालय मानक विहीन बने हुए है और कुछ तो ऐसे है जो की पहले से बने थे और उनको पैसा दिया जा चुका है। बहुत से ऐसे परिवार है जो की पात्र होते हुए भी शौचालय से वंचित है तथा खुले में शौच करने के लिऐ मजबूर है। इसके साथ कई ऐसे विकास कार्य है जिनका पैसा पास होने के बाद भी कार्य नहीं कराया गया। सवाल उठता है कि रसूखदार पंचायत सचिव सरकारी योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं और अधिकारी धृतराष्ट्र बने हुए हैं। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट लोहिया गांव की विकास योजनाएं भी भ्रष्टाचार में डूब रही हैं और अधिकारी घपलों से सने हाथ का साथ खुलेआम दे रहे हैं। इस बावत कोई भी अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
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