मानवाधिकार के समान नाम से चल रहे संघ, नहीं कस पा रहे नकेल जनता हो रही भ्रमित
फतेहपुर में कई एसे संगठन सक्रिय है जो मानव अधिकार आयोग से मिलते-जुलते नामों का उपयोग कर रहे हैं। इसी तरह प्रदेशभर में एसे कई संस्थाएं-एनजीओ है जो आम जनता में भ्रम पैदा कर रहे हैं। अनुचित उपयोग किया जा रहा है।
एेसी संस्थाओं के काम करने के कारण फतेहपुर समेत प्रदेशभर की आम जनता में यह भ्रम पैदा होता है कि यह मानव अधिकार आयोग से संबंधित सरकारी संस्था होगी और लोग इनके झांसे मे आ जाते हैं। इस तरह के संगठन मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मिलते-जुलते नाम, लघुकृत नाम और उसके प्रतीकों के समान प्रतीक चिह्नों का भी उपयोग कर रहे हैं। जबकि इनका राष्टीय और राज्य के मानवाधिकार आयोगों से कोई वास्ता नहीं होता है। यह सिर्फ एनजीओ, संघ-संस्था के रुप में नाम का पंजीकरण करवा कर अपनी गतिविधियां शुरु कर देते हैं।
मानव अधिकार से मिलते-जुलते सक्रिय संगठन
राजधानी सहित प्रदेशभर में मानवाधिकार आयोग के समान नाम वाले कई संगठन काम कर रहे है। यहां तक कि वाहनों पर भी प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष की नाम पट्टिका लगी नजर आती है। आयोग के समान नाम वाले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ, मानवाधिकार सुरक्षा संघ, मानव अधिकार संरक्षण संघ, मानवाधिकार सुरक्षा संरक्षण आर्गेनाइजेशन, मानवाधिकार सुरक्षा एवं संरक्षण आर्गेनाइजेशन, मानव अधिकार प्रोटेक्शन, ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन, राष्ट्रीय मानवाधिकार, भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन, केंद्रीय मानवाधिकार संघ-संगठन-एसोसिएशन आदि कई नामों वाले संगठनों से लोगों में भ्रम पैदा होता है। इन संगठनों का राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग से कोई वास्ता नहीं है। यहां तक कि राज्य व केंद्र सरकारों से भी किसी तरह का वास्ता नहीं है।
कई बार इन संस्थाओं द्वारा मानव अधिकार के नाम का दुरुपयोग करने का मामला सामने आया है। हर कहीं पहुंचकर लोगों को गुमराह करते है। जनता भी सतर्क रहे और एेसे संगठनों के खिलाफ आवाज उठाए। भ्रमित न हो। इस तरह से काम करने वालों के बारे में संबंधित जिलों की पुलिस को सूचित करें।
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