खतरे के निशान को पार करता गंगा-टोंंस नदी का जलस्तर, घरों तक पहुंचा पानी

रिपोर्ट - अरुन विश्वकर्मा

प्रयागराज /मेजा

खतरे के निशान से ऊपर पहुंचे गंगा-टोंंस नदी के जलस्तर तटीय क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों के ऊपर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। लोग धीरे-धीरे अपने घरों से पलायन कर रहे हैं। क्षेत्रों की फसल पूरी तरह से बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुकी है। आधे से ज्यादा फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। जिसे लेकर किसानों के चेहरे पर मायूसी साफ साफ देखी जा सकती है। प्रशासन ने हाई एलर्ट घोषित कर रखा है। नाविकों को 24 घंटे तैयार रहने के लिए कहा गया है कि किसी भी दशा में नाविक तैयार रहें। सैकड़ों एकड़ फसल बाढ़ के कारण बर्बाद हो गई। उरुवा विकास खंड के कठौली ग्राम सभा के जनवार मजरे की हालत सबसे बदतर है। इस गांव की 60 फीसदी फसल नष्ट हो चुकी है। जनवार गांव से मेजारोड़ बाजार एक किलोमीटर दूर है, लेकिन गंतव्य तक पहुंचने में घंटों का समय लग रहा है। उपजिलाधिकारी दयाशंकर पाठक ने बताया कि जनवार, बरसैता और अमिलिया में तीन नाव लगाई गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर नजर रखे हुए बरसैता में रमाशंकर, दयाशंकर निषाद के साथ कई किसानों की बाजरा तिल और अरहर की सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो गई है। जनवार गांव निवासी सवाजसेवी  सिद्धांत तिवारी ने कहां कि जो नाव प्रशासन की तरफ से लगाई गयी है वह छोटी है। लोगों को 1978 में आयी बाढ़ की  याद दिलाने लगी है। उसी क्रम में गंगा नदियों का जलस्तर भी काफी तेजी से बढ़ रहा है और जो तबाही मचाने के कगार पर पहुंच गया है।

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