चंद्रयान-2 की कामयाबी में खागा का लाल भी

फतेहपुर। चंद्रयान-2 की कामयाबी से पूरा देश खुश है। खागा के लिए तो यह विशेष गर्व का क्षण है। यहां विजयनगर के लाल सुमित कुमार ने उपकरण बनाने में योगदान देकर मिसाल कायम कर दी है। दरअसल चंद्रयान में लगे वैज्ञानिक उपकरणों को बनाने वाली इसरो की टीम में खागा का यह लाल भी शामिल है। यह इसरो के स्पेस अप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद में कार्यरत हैं। इस सेंटर को चंद्रयान-2 में वैज्ञानिक उपकरणों(पेलोड) बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इन्हीं उपकरणों के जरिए चंद्रयान के विभिन्न भागों को धरती पर डाटा भेजना है।

सुमित के पिता अर्जुन सिंह व मां लक्ष्मी देवी बेटे के इस योगदान से गदगद हैं। पिता वन विभाग कर्मी थे। मां रिटायर्ड शिक्षिका हैं। चार भाइयों अमित, सुमित, सुशील व सचिन में सुमित दूसरे नंबर के हैं। उपलब्धि से गदगद शुकदेव इंटर कालेज का स्टाफ भी है। सचिन ने बताया कि बड़े भाई सुमित ने माध्यमिक स्तर की पढ़ाई की और इसके बाद अगली शिक्षा के लिए लखनऊ चले गए। लखनऊ के बीबीडी कॉलेज से इलेक्ट्रानिक्स एवं कम्युनिकेशन में बीटेक किया। इसके बाद इसरो में 2008 से वैज्ञानिक हैं। पीएसएलवी और जीएसएलवी उपग्रह प्रक्षेपण अभियानों में भी योगदान रहा है। बकौल सचिन चंद्रयान के आर्बिटर में लगा हुआ पेलोड बनाने में भाई ने अपनी भूमिका बताई है। बताया है कि जब आर्बिटर चंद्रमा के चारों ओर घूमेगा तो पेलोड चंद्रमा की सतह की मैपिंग एवं विश्लेषण कर डाटा पृथ्वी पर भेजेगा। पेलोड बनाने में पूरी टीम का योगदान है। पेलोड बनाने के काम में कई साल लग गए। तैयार किए गए पेलोड बंगलुरू भेजे गए, वहां इसरो उपग्रह केंद्र में इन्हें सेटेलाइट से जोड़ा गया। सोमवार को श्री हरिकोटा से लांच किया गया। बड़े भाई का योगदान वैज्ञानिक उपकरण बनाने में रहा जो चंद्रयान के आर्बिटर में लगे हैं। यह मिशन न सिर्फ उपग्रह के चंद्रमा तक पहुंचने का है बल्कि उपग्रह के चंद्रमा की सतह पर उतरने का भी है। रोवर को सतह पर उतारा जाएगा जबकि आर्बिटर चंद्रमा की परिक्रमा करेगा। आर्बिटर में आठ, रोवर में चार और लैंडर में दो पेलोड लगे हैं। यह अपने-अपने डाटा पृथ्वी पर भेजेंगे। चंद्रयान के सभी भागों का रोल अलग-अलग होगा। उन्होंने कहा कि जब तक चंद्रयान अपने अंतिम लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेता है, तब तक सभी नजर बनाए हुए हैं।

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