तीन हजार हेक्टेयर भूमि पर वन विभाग को मिलेगा हक
फतेहपुर : वर्ष 1954 में वन विभाग के लिए अधिसूचित की गई करीब तीन हजार हेक्टेयर भूमि में विभाग को मालिकाना हक दिलाने की पहल की जा रही है। वर्तमान में इस भूमि पर अवैध कब्जे हैं। प्रशासन ने खतौनी में नाम दर्ज कर भूमि को कब्जा मुक्त कराने का निर्देश उपजिलाधिकारियों को दिए हैं।
जिलाधिकारी संजीव सिंह ने आदेश में कहा है कि तीनों तहसीलों में अधिसूचित भूमि को वन विभाग के पक्ष में दर्ज किया जाए, साथ ही जमीनों का चिह्नांकन करते हुए कब्जा दिलाया जाए। इस आदेश से उन किसानों में हड़कंप मच गया, जो लंबे समय से इन जमीनों पर खेती करते आ रहे हैं। वन विभाग के दस्तावेजों के आधार पर यह भूमि जिले के 56 गांवों में है। समय पर कार्रवाई नहीं होने के चलते इन जमीनों को कई किसानों ने पट्टे के जरिये अपने नाम कराया, फिर भूमिधरी दर्ज करा लिया। प्रशासन के आदेश से स्पष्ट है कि भूमिधर आदेशों को निरस्त किया जाएगा।
सीलिग में छूटी थी जमीनें
सीलिग एक्ट के तहत वर्ष 1952 में सरकार ने बड़े किसानों, जमीदारों से जमीन वापस ली थी। उस दौरान बड़े पैमाने में लंबी जोत वाले किसानों की जमीनें छूट गई थीं। सरकार ने सात हजार हेक्टेयर जमीन वन विभाग के नाम अधिसूचित कर दी था, जिसमें चार हजार हेक्टेयर भूमि खतौनी में नाम दर्ज करा विभाग ने कब्जा ले लिया था। तीन हजार हेक्टेयर जमीन खतौनी में नहीं दर्ज हो सकी। डीएफओ सीपीएस मलिक ने कहा कि जो जमीन विभाग को मिलेगी, उसे वन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
वन विभाग और तहसील अधिकारियों के साथ बैठक कर जमीन खाली कराने के लिए तहसील स्तर पर कमेटियां बना दी गई हैं। शीघ्र ही तीन हजार हेक्टयर भूमि खाली करा वन विभाग को देंगे।
- संजीव सिंह, जिलाधिकारी
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