ईडी जांच की आंच पहुंचने से बढ़ी दहशत

फतेहपुर : अवैध मौरंग खनन व अनियमित पट्टों की जांच में सीबीआइ के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा कसने से नेताओं व अधिकारियों की धड़कन तेज हो गई है। वर्ष 2012 से 17 तक हुए खनन जांच हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआइ कर रही है। लाल सोना के खेल में करोड़ों संपत्ति का मामला खुलने से फतेहपुर समेत चार जिलों की जांच ईडी को मिल गई है। पांच साल के दौरान जिले में काबिज रहे अफसरों व उस समय खनन से जुड़े कई सफेदपोश नेताओं की दहशत बढ़ गई है।

सपा शासन काल में मौरंग कारोबार ने सैकड़ों लोगों को फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया। यमुना के कोर्रा, ओती, संगोलीपुर गढ़ा, अढावल आदि खदानों में खनन कराया गया। सीबीआइ की जांच में यह बात भी सामने आई कि वर्ष 2012-13 में तत्कालीन डीएम अभय ने हाईकोर्ट की रोक के बाद भी जिले में पांच खदानों का नवीनीकरण किया। आखिर किसके दबाव व प्रभाव में मानक से हटकर अनियमित पट्टा किए गए इसका खुलासा होने के बाद ईडी की निगाह संपत्तियों पर टिक गई है। पिछले दिनों सीबीआइ टीम ने तत्कालीन डीएम अभय के आवास व जिले के दो पट्टाधारकों के यहां छापामारी कर दस्तावेज हासिल किए और सघन पूछताछ की। इसके बाद फतेहपुर, कौशांबी, देवरिया, शामली की जांच ईडी को सौंप दी गई है। सीबीआइ जांच से परेशान नेता व अफसर ईडी की जांच शुरू होने से खासे परेशान हो गए है।

खनन मंत्री से जुड़े थे तार

- मौरंग खनन का पट्टा किसी के नाम रहा हो उस समय पूरा खेल खनन मंत्री गायत्री प्रसाद के इशारे पर ही चलता था। जिले की खदानों में कई सपा नेताओं की सीधे हिस्सेदारी की बात भी सामने आ रही है। इसमें से कुछ नेताओ से सीबीआइ पूछताछ भी कर चुकी है। अवैध खनन में हर दिन होने वाली लाखों की कमाई का हिस्सा किसके पास पहुंचता था, खनन से जुड़े कई माफिया ऐसे भी है जिनकी संपत्ति तीन से चार सालों में कई गुना बढ़ गई। नामी व बेनामी संपत्ति बनाने वालों इस समय बचाव के प्रयास में लगे हुए है। बिन मांगे पहुंचती थी खेप

अवैध खनन में सिडीकेट की इस तरह से तूती बोलती थी कि अफसर भी सब जानते हुए कुछ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। इसका कारण यह भी था कि अफसर व नेताओं के यहां मासिक सुविधाशुल्क पहुंच जाती थी। इस दौरान जिले में रहे डीएम, एसपी, एसडीएम व एडीएम भी जांच के दायरे में आ सकते है।

जलधारा से निकलती थी मौरंग

उस समय खनन में मानकों की पूरी तरह से अनदेखी होती रही। रात के अंधेरे में यमुना की जलधारा में लिफ्टर लगाकर खनन किया जाता रहा। यमुना की बीच धारा से मौरंग निकालने के लिए कई खदानों में जलधारा को मोड़ने के लिए बंधा व अवैध पुल तक का निर्माण किया गया। अवैध पुल के निर्माण की शिकायत पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तत्कालीन कमिश्नर बीके सिंह, डीएम राकेश कुमार व खनन अधिकारी को निलंबित कर दिया था।

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