माहौल शांत लेकिन घर नहीं लौटे कई परिवार

जोनिहा(फतेहपुर)। बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के बेहटा गांव में माहौल शांत होने से जनजीवन पटरी पर आ रहा है। गांव की दुकानें खुलने लगी हैं महिलाएं बच्चों को लेकर बाहर निकलने लगी हैं। करीब तीस घरों में तालेबंदी है। बवाल के पांच दिन बाद उपद्रवकारियों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है। पीएसी, पुलिस तैनात है।

बता दें कि बेहटा गांव के मदरसे से मंगलवार को मांस बरामद होने के बाद जमकर बवाल हुआ था। तोड़फोड़ आगजनी की गई थी। साठ बवालियों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। गोकशी के तीनों आरोपी जेल जा चुके हैं। वहीं बलवे के मामले में पुलिस ने एक भी आरोपी को नहीं पकड़ा है। पुलिस लगातार छापेमारी, संदिग्धों की धरपकड़ का दावा कर रही है। आरोप लग रहा है कि एक भी बलवे का आरोपी पकड़ा नहीं गया है। 

गांव के मुस्तफा,मकसूद, जलाल खां, मेहंदी, हाशिम, हामिद समेत तीस से चालीस घरों में तालेबंदी है। वह नाते रिश्तेदारों के घरों में भागे हैं। उनमें एक पक्ष के लोगों की दहशत होना माना जा रहा है। हालांकि पुलिस, पीएसी की मुस्तैदी से लोग खुद को सुरक्षित मान रहे हैं। परचून की दुकानें शनिवार को खुली दिखी। महिलाएं बच्चों को लेकर घरों के बाहर दिखाई दी। सीओ अभिषेक तिवारी ने बताया कि चिन्हित बलवाइयों की गिरफ्तारी जरूर की जाएगी। वह गांव में इन दिनों नहीं है। उनका सुराग लगाया जा रहा है। पुलिस चिन्हितों की तलाश में घर और रिश्तेदारों के यहां छापेमारी कर रही है।

मदरसे में बवाल के दौरान गांव के किसान असलम खां परिवार समेत घर में ताला लगाकर रिश्तेदार के घर चले गए थे। असलम खां परिवार समेत घर लौटे हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार शांतिप्रिय तरीके से रहता है। गांव में बवाल के समय उनकी पत्नी निशात बानो की बीपी लो और भाई रज्जाक का बीपी हाई हो गया था। मदरसे, इबादत स्थल में बवाल की सूचना पर घबरा गए थे। किसी भी समय घर में हमला होने का भय सताने लगा था। इसी वजह से चुपचाप गांव छोड़कर चले गए थे। हालांकि अब गांव में शांति का माहौल है।

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