नीली-पीली पर्ची पर पाबंदी, अस्पताल की रसीद पर मिलेगी दवा

फतेहपुर: सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन दवाओं की बिक्री में कमीशन का जादू डॉक्टरों के सिर चढ़ कर बोल रहा है। नतीजा कि नीली, पीली पर्चियों में धडल्ले से बाहर की दवाएं लिखी जाती है। डीएम संजीव सिंह ने अस्पताल की नई व्यवस्था लागू करते हुए नीली-पीली पर्ची पर दवा लिखने की पाबंदी लगा दी। अब सरकारी पर्चे के साथ अस्पताल की रसीद बुक पर ही दवाएं लिखी जाएंगी, यदि कोई जीवन रक्षक दवा अस्पताल में नहीं है तो डॉक्टर सरकारी पर्चे पर उसे लिखेगा। मरीज की स्वयं की मर्जी होगी कि वह दवा कहां जाकर खरीदेगा। इसके साथ ही डीएम ने ओपीडी चेंबरों में बैठकर भिन्न भिन्न कंपनियों की दवाएं लिखाने वाले दलालों पर भी नजर गड़ा दी है।

दरअसल जिला अस्पताल में ओपीडी व भर्ती मरीजों का उपचार करने वाले डाक्टर बड़े पैमाने पर बाहर की दवाएं लिखते हैं। जिसका प्रमुख कारण यह है कि हर डाक्टर के पास किसी न किसी एक कंपनी का दलाल बैठता है। जो कि अलग-अलग दवा कंपनियों के एमआर के सेटिग-गेटिग रखते है। बाहर की दवा लिखने पर डाक्टर को 30 से 40 फीसद कमीशन मिलता है। यह दवाएं केवल जिला अस्पताल के निकट खुले मेडिकल स्टोरों पर ही मिलती है। चूंकि एमआर उन दवाओं की आपूर्ति उन्हीं मेडिकल स्टोर को देते है। नतीजा कि सरकारी दवाएं डंप रहती हैं और बाहर की दवाएं धड़ल्ले से बिकती हैं। मैने कई बार जिला अस्पताल का निरीक्षण किया है, निरीक्षण दौरान पाया गया कि डाक्टर पर्चे के साथ ही दवाए बाहर से लिखते हैं। इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। अब केवल अस्पताल प्रिटेड पर्ची पर ही दवा लिखी जाएगी। ताकि मरीज को निश्शुल्क दवाओं का लाभ मिल सके। मेरी निगाह अस्पताल के उन लोगों पर भी जो अस्पताल में बैठक कर बाहर की दवाएं लिखवाते है। ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखाकर जेल भेजा जाएगा। - संजीव सिंह डीएम

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