विद्यालय में शुरू नहीं हो पाई कक्षाएं, गिरने लगी इमारत

बहुआ: सरकारी भवनों के निर्माण में कमीशन बाजी के चलते गुणवत्ता, मानक आदि के मायने ही नहीं बचे हैं। ब्लाक क्षेत्र के कोर्रा कनक गांव में ढाई वर्ष से बन रहा राजकीय विद्यालय इसका उदाहरण है। बारिश में आधे अधूरे भवन की पोल खुल गई। छत से पानी टपक रहा है वहीं दीवारों का पलास्टर झड़ रहा हैं। जिसके चलते गांव के जूनियर विद्यालय में ही कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया गया।

निर्माणाधीन भवन की छत से जहां पानी टपक रहा तो वही दीवालों का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। काम की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में रोष है। बहुआ ब्लाक के यमुना किनारे के गांवों को हाईस्कूल तक सरकारी शिक्षा मिले इसके लिए इस गांव में ढाई साल पहले 46 लाख की लागत से राजकीय स्कूल बनना शुरू हुआ था। शिक्षा का संसाधन पाकर ग्रामीण जहां खुश तो तो क्षेत्रीय विधायक ने भी इस विद्यालय का लोकार्पण कर दिया था। स्कूल संचालन का दबाव पड़ा तो माध्यमिक शिक्षा विभाग ने गांव के जूनियर हाईस्कूल में कक्षा नौ व दस की कक्षाएं प्रारंभ कर स्कूल को चालू दिखा दिया, लेकिन आज तक इस स्कूल का काम कार्यदायी संस्था पूर्ण नहीं कर पाई है। अब जब इसके गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे तो कार्यदायी संस्था दबाने के प्रयास में जुट गयी है। टेक्निकल कमेटी कराएंगे जांच: डीआईओएस

जिला विद्यालय निरीक्षक महेंद्र प्रताप से इस संबंध में जब बात की गयी तो उन्होंने बताया कि उक्त स्कूल का निर्माण पैक्सपेड नामक कार्यदायी संस्था कर रही है। अभी यह विद्यालय विभाग को हैंडओवर नहीं है। हम इसकी जांच तकनीकी कमेटी से जांच कराकर हैंडओवर लेंगे। अगर कुछ खामियां है तो कार्यदायी संस्था उसे पूरा कराएगी। यदि पूरी इमारत गुणवत्ता विहीन है तो हम संस्था पर मुकदमा भी दर्ज कराएंगे।

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