गांवों में बेहतर बिजली के लिए खर्च किए जाएंगे 13 करोड़
रायबरेली। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर बिजली आपूर्ति और बिजली चोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना के तहत 13 करोड़ से खुले और जर्जर तारों की जगह एरियर बंच कंडक्टर (एबीसी) लगाई जाएगी। जिले में सात ब्लॉकों के 201 गांवों को चिह्नित कर लिया गया है। जल्द ही यहां एबीसी केबल लगाने का काम शुरू होगा। इससे करीब पांच लाख लोगों को बिजली समस्या से राहत मिलेगी।
ग्रामीण क्षेत्र में खुले और कई साल पुराने तारों के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है। इन तारों में लोग कटिया डालकर आसानी से बिजली चोरी कर लेते हैं। साथ ही लाइनलॉस भी ज्यादा होता है। आए दिन फॉल्ट के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए अब गांवों में केबल लगाई जाएगी, ताकि लोगों को भरपूर बिजली मिल सके।
साथ ही कोई खतरा भी न हो। गांवों में अक्सर तार टूटने की घटनाएं होती रहती है। जिन गांवों में बिजली के पोल जर्जर है, उन पोलों को भी योजना के तहत बदला जाएगा। इसके साथ ही जिन पोल से पोल की दूरी ज्यादा हैं, वहां पर नया पोल लगाकर केबल को टाइट किया जाएगा। इस कार्य को कराने के एलएंडटी को जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।
सात ब्लॉकों के 201 गांवों में 345 किलोमीटर एबीसी केबल लगाई जाएगी। केबल में केवल पोल के पास से ही उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिए जाएंगे। बीच में केबल नहीं काटी जाएगी। ताकि कोई बीच में केबल डालकर बिजली चोरी न कर सकें। कार्य पूरा होने के बाद अन्य गांवों में भी इस तरह कार्य कराया जाएगा।
अमावां, बछरावां, सलोन, छतोह, लालगंज, रोहनिया, सरेनी ब्लॉक क्षेत्र के उन गांवों में कार्य कराया जाएगा। जहां की आबादी 2011 की जनगणना के हिसाब से एक हजार से ज्यादा है और बिजली चोरी होती है। केबल लगाने का मकसद बिजली चोरी रोकने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली उपलब्ध कराना है।
मुख्य अभियंता पावर कॉर्पोरेशन एआर सिंह ने बताया कि गांवों में जर्जर तारों की जगह एबीसी केबल लगाई जानी है। सात ब्लॉक क्षेत्र के 201 गांवों में करीब 13 करोड़ की लागत से काम होना है। इन गांवों में कार्य पूरा होने के बाद अन्य ब्लॉक क्षेत्र के गांवों में कार्य शुरू कराया गया है।
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