सिचाई विभाग में तबादला नीति को ठेंगा

फतेहपुर। सिचाई विभाग में तबादला नीति को ठेंगा दिखाया जा रहा है। रवि प्रकाश का स्थानांतरण प्रमुख अभियन्ता लखनऊ द्वारा पिछले वर्ष 31 मई 18 को किया गया था, पर उन्हें अभी तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है। कई साल से डटे कर्मचारी को हटाने की मंशा पर पानी फिर रहा है।

योगी सरकार ने सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और कामकाज में पारदर्शिता लाने के मकसद से तबादला नीति बनाई। इसके अंतर्गत एक जिले में लगभग तीन साल और मंडल में छह साल पूरा करने वाले अधिकारी, कर्मचारियों को स्थानांतरण पर काम शुरू किया। इस नीति में तमाम विभागों में अधिकारी, कर्मचारी इधर-उधर हो गए। इससे नलकूप विभाग अछूता नहीं रहा। विडंबना यह है कि अधिशाषी अभियंता फतेहपुर द्वारा रविप्रकाश को कार्य मुक्त ना करके इनसे अवैधानिक कार्य कराये जा रहे हैं जो की रवि प्रकाश सहायक ने अपने स्थानान्तरण प्रार्थनापत्र में इस बात की पुष्टि भी की है। उक्त वरिष्ठ सहायक गलत ढंग से अपने मनमाफिक कार्य कराने के आदी हो चुके हैं।  जिसका लाभ अधिशाषी अभियंता एवं रविप्रकाश द्वारा राजकीय धन की अनीमितता  करते हुए पूर्ण रूपेण लाभ उठाया जा रहा है। रविप्रकाश अपना कार्यक्षेत्र छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसमें आला अधिकारी उनका साथ देखते दिखाई दे रहे हैं।

इतना ही नहीं मानवाधिकार एवं उपभोक्ता फोरम के जिलाध्यक्ष श्रीराम अग्निहोत्री ने बताया कि अधिशाषी अभियंता जबकि उक्त खण्ड में शिवेंद्रराज वरिष्ठ सहायक लगभग एक वर्ष से कोई कार्य/पटल आवंटित नहीं कि गई है।  इसी खण्ड में सुभाष कनिष्ठ सहायक को कोई पटल/कार्य अभीतक आवंटित नहीं किया गया है।  जिसकी अवधि लगभग एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका हैं। दोनो को बिना किसी कार्य का वेतन दिया जा रहा है। 

जब नरेंद्र मोदी ने 2014 में दिल्ली की गद्दी संभाली तो उन्होंने पूरी व्यवस्था को सुधारने का फैसला लिया था. उनकी सरकार ने नौकरशाही के काम करने के तरीके को बदलने की योजना बनाई और भ्रष्ट अधिकारियों को सजा देने का फैसला किया।

लेकिन कई साल बीतने के बावजूद आज भी नौकरशाही उसी ढर्रे पर काम कर रही जिस पर वो हमेशा से काम करती रही है। जहां तक भ्रष्ट और दागी अधिकारी व कर्मचारी पर कार्रवाई की बात है तो वो ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ जैसी बात है। आज भी व्यवस्था की सफाई के लिए जरूरी, दागी अधिकारियों पर कार्रवाई बहुत धीरे धीरे चल रही है और अपने निर्धारित लक्ष्य से बहुत पीछे है।

श्रीराम अग्निहोत्री कि रिपोर्ट

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