वर्क एजेण्ट को बना दिया लैब सहायक
जल निगम की लैब में कहने को तो चार कर्मियों की तैनाती होनी चाहिए, लेकिन महज एक कर्मचारी ही चार लोगों का काम करने को मजबूर हैं। कहने को तो पानी की गुणवत्ता की जांच करने के लिए लैब सहायक का होना अनिवार्य है, लेकिन विभागीय अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त वर्क एजेंट से लैब का काम ले रहे हैं।
पानी की गुण्वत्ता जांचने के लिए जल निगम की लैब में लैब सहायक के अलावा लैब अटेंडेंट, केमिस्ट व कम्प्यूटर ऑपरेटर की तैनाती होती है, लेकिन कई सालों से लैब में एक ट्रेनिंग शुदा फील्ड का काम करने वाले वर्क एजेंट से विभाग के अधिकारी पानी की जांच करा रहे हैं। वर्ष 2013 में तीन सालों के लिए संविदा पर सभी पदों पर कर्मचारी नियुक्त किए गए थे, लेकिन उनके काम छोड़ने के बाद सभी पदों का काम वर्क एजेंट से ही लिया जा रहा है। वर्ष 2004 से पानी की जांच करने के लिए लैब में किसी भी लैब सहायक की तैनाती नहीं की गई,जबकि लैब का काम वर्क एजेंट से लिया जा रहा है।
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