पांच साल से आबाद होने की राह देख रहा ट्रांसपोर्ट नगर
फतेहपुर : शहर को जाम से निजात दिलाने की योजना लाखों रुपये पी गई, लेकिन मुसीबत कम नहीं हुई। 15 साल पहले भारी वाहनों से लगने वाले जाम से मुक्ति के लिए बसाया गया ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारियों के न जाने से वीरान पड़ा है। डेढ़ साल पहले आटीआइ रोड पर जाम का कारण बनी सब्जी मंडी के व्यापारियों को यहां बसाया गया तो प्रशासन ने रोक लगा दी। हाल यह है कि नगर पालिका 56 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी कोई आय नहीं कर पा रही है। वहीं शहर जाम से कराह रहा है।
शहर भर में फैले ट्रांसपोर्टरों के कारण ट्रक व भारी वाहन धमाचौकड़ी दिन-रात रहती है। लोडिंग-अनलोडिंग के लिए सड़क पर खड़े इन वाहनों से दिन भर जाम लगता है। इसे देख वर्ष 2004 में तत्कालीन एडीएम व नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी उदयराज ने ट्रांसपोर्ट नगर बसाने की योजना बनाई थी। इसके तहत लखनऊ बाईपास के पास दुकानें बनवाई गईं, लेकिन ट्रांसपोर्टर वहां नहीं गए। नगर पालिका ने इस योजना में तब 56 लाख रुपये खर्च किए थे। अधिशासी अधिकारी मीरा सिंह कहती हैं कि ट्रांसपोर्ट नगर योजना ट्रांसपोर्टरों के रुचि न लेने से सफल नहीं हुई। डेढ़ साल पहले पालिका बोर्ड ने खुदरा सब्जी मंडी बनाने का प्रस्ताव पास किया था। लेकिन, नियमों के चलते प्रशासन ने इसपर रोक लगा दी। वहां बनी दुकानें अब धूल फांक रही हैं। अब बोर्ड बैठक में इस प्रकरण को रखा जाएगा और जमीन-दुकान के उपयोग के बारे में सभासदों की राय लेकर फैसला किया जाएगा। सब्जी व्यापारी तो तैयार थे लेकिन प्रशासन ने लगाया पेंच शहर में आइटीआइ रोड में प्राइवेट सब्जी मंडी लगती थी। इससे सड़क जाम हो जाती थी। इस पर प्रशासन ने यहां से हटाकर मंडी समिति में नई सब्जी मंडी बना दी। लेकिन मंडी समिति के शहर से दूर होने के कारण आढ़तियों ने वहां जाने से मना कर दिया। ट्रांसपोर्ट नगर में सब्जी मंडी का प्रस्ताव आया तो बहुत सारे आढ़तियों ने यहां दुकानें ले लीं। लेकिन प्रशासन ने यह कहते हुए इसे बंद करा दिया कि नियमानुसार 20 किमी के दायरे में दूसरी मंडी नहीं लग सकती है। नगर पालिका यह प्रस्ताव नहीं बना सकता।
योजना : ट्रांसपोर्ट नगर
जमीन : 5.50 बीघा
दुकानें : 46
जमानत राशि : 2.5 लाख रुपया
किराया : 2,000 रुपया
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