बेसहारा मवेशी बने आफत, जिम्मेदार साध रहे मौन

फतेहपुर : शासन का आदेश हो या फिर प्रशासन कहे लेकिन अन्ना मवेशियों से शहर को निजात नहीं मिल पा रही है। पूर्व में शासन के आदेश पर दो माह पहले डीएम संजीव कुमार सिंह ने शहर के अन्ना मवेशियों को पकड़ने के लिए नगरपालिका प्रशासन को निर्देशित किया था। अन्ना जानवर मुसीबत बने हुए हैं तो यातायात में दिक्कत खड़ी कर रहे हैं। आए दिन मार्ग दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोग परेशान हो रहे हैं लेकिन प्रशासन इस काम की सुधि नहीं ले रहा है।

जिले के हाकिम डीएम के आदेश की धज्जियां जिले के जिम्मेदार उठा रहे हैं। कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में अन्ना मवेशियों की समस्या को संज्ञान में डीएम ने किया तो शहर के यातायात में दिक्कत खड़ी कर रहे मवेशियों को पकड़ने के लिए नगर पालिका प्रशासन को निर्देशित किया था। दो माह का समय बीत चुका है अभी तक अन्ना मवेशी पकड़े जाने की शुरुआत तक नहीं हुई थी। मार्च माह में नगर पालिका ने अलबत्ता शुरूआत की थी। आईटीआई रोड आदि में धरपकड़ करके इतिश्री कर ली। शहर में आईटीआई रोड, पत्थर कटा चौराहा, शादीपुर, रेलवे स्टेशन, पटेल नगर, चौक बाजार, जयरामनगर, देवीगंज, राधानगर, अशोक नगर, कलेक्ट्रेट आदि जगहों में अन्ना मवेशियों के झुंड देखने को मिल जाएंगे। इन मवेशियों के झुंडों से आए दिन दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। मवेशी आपस में लड़कर राहगीरों को चोटिल कर रहे हैं। अपर जिलाधिकारी पप्पू गुप्ता कहते हैं कि नगर पालिका प्रशासन से बात की जाएगी। अन्ना जानवर क्यों नहीं पकड़े जा रहे हैं की तफ्तीश करते हुए मवेशियों को पकड़वाया जाएगा। नगर पालिका में कैटिल दस्ता कागजों में दर्ज शासन ने हर नगर पंचायत और नगर पालिकाओं में कैटिल दस्ता गठित करने के निर्देश दिए हैं। नगर पालिका और नगर निकायों में यह काम कागजों में सीमित होकर रह गया है। निकायों ने भले ही कैटिल दस्ता गठित किया हो लेकिन धरपकड़ के नाम पर कार्यवाही नहीं हो रही है। जिससे लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। वहीं मवेशी पाल कर दूध निकालने की प्रवृत्ति में इजाफा हो रहा है जो परेशानी का कारण बना हुआ है। प्रशासन की शिथिलता के चलते लोग इस गलत काम से अपने आप को रोक नहीं पा रहे हैं।

Comments

Popular posts from this blog

*मा0 मंत्री कृषि ने 05 दिवसीय पारम्परिक मेला/महोत्सव का किया उद्घाटन*

सर्द हवा से बढ़ी ठिठुरन, ठंड से एक की मौत

*मानसिक दिव्यांगता प्रमाणीकरण शिविर*