कुपोषण की निगरानी को बजेगी आशा व आंगनबाड़ी की घंटी
फतेहपुर: कुपोषण से निपटने के लिए चल रहे प्रयास की निगरानी होगी। लखनऊ में स्थापित कॉल सेंटर सीधे गांव स्तर पर तैनात कर्मचारियों पर नजर रखेगा। हर माह एएनएम से नौ बार, प्रधान से एक बार व आशा व आंगनबाड़ी से दो-दो बार फोन पर वीएचएनडी (ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस) की पूछताछ की जाएगी। जानकारी में भिन्नता होने पर इन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति होगी।
नवजात शिशु मृत्युदर एवं मातृ मृत्युदर को कम करने के लिए पोषण कार्यक्रम संचालित है। जिसके तहत प्रत्येक माह ग्राम सभा स्तर पर वीएचएनडी का आयोजन होता है। दावा है कि जिले में इस कार्यक्रम को बेहतर ढंग से चलाया जा रहा है, लेकिन हकीकत दावों से इतर है। कार्यक्रम को सही रूप से संचालित करने के लिए राज्य स्तर पर कॉल सेंटर स्थापित किया है। जो पूरे कार्यक्रम की निगरानी करेगा। कॉल सेंटर व ब्लॉक से जिले स्तर के अफसर द्वारा की गयी निगरानी का मिलान करने के साथ ही इस कार्यक्रम में ढिलाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। सरकार की इस व्यवस्था से गांव स्तर के कर्मचारियों में भय है वहीं यह भी माना जा रहा है कि कागजी तौर पर भेजी जाने वाली सूचना भी इससे पकड़ जाएगी।
वीएचएनडी में किसकी क्या है भूमिका
एएनएम को एक वर्ष से छोटे बच्चों का पूर्ण प्रतिरक्षण करना है। नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाना है। हर गर्भवती की प्रसव पूर्व वजन, रक्तचाप, पेशाब, खून की जांच कराकर देखना है। गंभीर होने पर इन्हें जिला अस्पताल तक पहुंचाना है। आशा को वीएचएनडी के दिन लाभार्थियों को बुलाकर लाना है, उनकी देखभाल करना, टीकाकरण, स्तनपान, ऊपरी आहार, सफाई की जानकारी देना। आंगनबाड़ी को बच्चों व महिलाओं का ग्रोथ चार्ट बनाना, पोषाहार वितरण, अति कुपोषित बच्चों का पुन: वजन व उनको बेहतर उपचार दिलाना। उपरोक्त कार्य वीएचएनडी के तहत उक्त गांव स्तर के कर्मचारियों के लिए निर्धारित है। निगरानी प्रारंभ हो चुकी है- सीएमओ
सीएमओ डॉ. उमाकांत पांडेय बताते है कि वीएचएनडी की निगरानी प्रारंभ हो चुकी है। लखनऊ के कॉलसेंटर से सीधी काल कर्मचारियों के पास आती है और उनसे काम का फीड बैक लिया जाता है। जिन कर्मचारियों के बारे कार्रवाई के निर्देश आते है उन पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाती है।
दैनिक जागरण की copy
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