मनरेगा में रोजगार की मंदी, श्रमिक पलायान को मजबूर
फतेहपुर : इसे जिम्मेदारों की अनदेखी कहें या व्यवस्था में खामी, साल में सौ दिन के रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना भरोसा खोती जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में ढाई लाख से अधिक जाबकार्ड धारकों में मात्र 47 हजार श्रमिकों को ही काम मिल पाया है। आधे गांवों में मनरेगा के कार्य ठप है। श्रमिक शहर की ओर पलायन को मजबूर हैं।
चालू वित्तीय वर्ष में पंचायत स्तर पर तैयार कार्ययोजना में एक अरब से अधिक का श्रम बजट स्वीकृत किया गया। जून में तालाबों की खुदाई व अगस्त में पौधारोपण को छोड़ कर पंचायतों में दूसरे कार्य कराए ही नहीं गए। समय से धन न मिलने की बात कहकर प्रधान व पंचायत सचिव पल्ला झाड़े हैं। इसके चलते ढाई लाख में से करीब दो लाख जाबकार्डधारकों को एक दिन भी काम नहीं मिला है।
मजदूर बढ़ने से घट गया रेट
-गांव में काम न मिलने से शहरों में मजदूरों की संख्या बढ़ी तो मजदूरी कम हो गई। गाजीपुर के सिमरन ने बताया कि एक साल से मनरेगा में काम नहीं मिला। शहर में जिस काम के साढ़े तीन सौ मजदूरी मिलती थी अब तीन सौ भी नहीं मिलती। हफ्ते में तीन दिन बिना काम के वापस आना पड़ता है।
ब्लाक - जाब कार्ड धारक - मिला काम
ऐराया - 20539 - 4555
अमौली - 21389 - 4393
असोथर - 20835 - 4592
बहुआ - 20349 - 3507
भिटौरा - 20825 - 3489
देवमयी - 15329 - 3055
धाता - 16979 - 2643
हसवां - 17584 - 3101
हथगाम - 21996 - 5048
खजुहा - 20149 - 3178
मलवां - 18524 - 3249
तेलियानी - 19100 - 2834
विजयीपुर - 18419 - 3189
कुल योग - 2,52,017 - 46813
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कोट
जिन गांवों में मनरेगा के काम ठप है उनके पंचायत सचिव व प्रधानों को नोटिस देकर काम शुरू कराने को कहा गया है। हर गांव में कम से एक काम अनवरत चलता रहे इसके प्रयास किए जा रहे हैं।
पुतान सिह, उपायुक्त, मनरेगा
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