फतेहपुर की पुरातात्विक धरोहरें मांग रहीं संरक्षण

फतेहपुर : ऐतिहासिक व पुरातात्विक दृष्टि से अहम् दोआबा धरती फतेहपुर में संरक्षण न होने से प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरें खंडहर होती जा रही हैं। कुरारी, ठिठौरा व तेंदुली के मध्यकालीन शैली को दर्शाने वाले ईंटों के मंदिर नेस्तनाबूद होने की कगार पर हैं। पुरातत्व विभाग ने इन स्थलों को संरक्षण सूची में शामिल किया पर सिर्फ बोर्ड लगाकर क‌र्त्तव्य की इतिश्री कर ली। नई पीढ़ी को इन स्थलों की महत्ता पता ही नहीं है। केंद्र व प्रदेश सरकार जहां पर्यटक स्थलों को विकसित करने पर जोर दे रही है, वहीं सांस्कृतिक धरोहरों की उपेक्षा जनप्रतिनिधियों व अफसरों पर सवाल खड़े कर रही है।

पुरातात्विक स्थलों की ये थी खूबियां..

काकोरा बाबा का मंदिर

बहुआ कस्बे में काकोरा बाबा के नाम से प्रसिद्ध दसवीं शताब्दी का मंदिर है। पत्थर व ईंट से निर्मित मंदिर के स्तंभ व स्थापत्य शिल्प दर्शनीय है। मंदिर के गर्भ गृह तक पहुंचने के लिए ईंटों से निर्मित सोपान हैं जिसमें भगवान विष्णु की शेषनाग प्रतिमा विद्यमान है। संरक्षण के अभाव में यह मंदिर खंडहर हो रहा है। सोलह कोणीय देवरा बाबा का मंदिर बहुआ कस्बे से तीन किमी दूर तालाब किनारे स्थित सोलह कोणीय देवरा बाबा का मंदिर अदभुत है। मंदिर के गर्भ गृह के अंदर शैल वास्तुशिल्प के अनेख खंड विद्यमान हैं। ईंटों से मंदिर में खूब अलंकरण किया गया है जिसमें प्रवेश द्वार के कुछ भाग भी है। कुरारी के इस मंदिर के पश्चिमी भाग में एक समतल टीले व अन्य भाग में मंदिर के अवशेष हैं लेकिन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में।

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