जमीन खाली कराने गई वन विभाग की टीम को लोगों ने लाठी लेकर दौड़ाया
औंग/फतेहपुर। वन विभाग की जमीनों पर अरसे से काबिज लोगों को हटाने में प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। गुरुवार को कस्बे के गलाथा गांव के मजरे बेरीनारी में जमीन खाली कराने गई वन विभाग की टीम को लोगों का भारी विरोध झेलना पड़ गया। मौके पर काबिज ग्रामीणों ने वनरक्षक रवींद्र कुमार, वन दरोगा फतेह बहादुर सिंह और श्रवण शुक्ल को लाठी लेकर दौड़ा लिया। टीम ने मदद के लिए औंग थाना पुलिस को फोन कर बुलाया, तब जाकर स्थितियां सामान्य हुईं।
गलाथा वन ब्लाक के बीट इंचार्ज वनरक्षक रवींद्र कुमार गश्त पर थे। उन्होंने देखा कि वन विभाग की जमीन पर प्रकाश निषाद नाम का व्यक्ति पक्का निर्माण करा रहा था। उसने नींव भी भर ली थी। इसी गांव का मिस्त्री दिनेश निर्माण कर रहा था। दोनों को मना किया गया। इस पर वनरक्षक के काम रुकवाने से नाराज लोगों ने दौड़ा लिया। ग्रामीणों का रुख भांपकर उसने अपने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। सूचना पाकर बिंदकी वन रेंज के वन दरोगा फतेह बहादुर सिंह और श्रवण कुमार शुक्ल भी मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने वन विभाग की पूरी टीम को
लाठी-डंडे लेकर दौड़ा लिया। उन्हें घेर कर बंधक बना लिया। वन दरोगा फतेह बहादुर सिंह ने औंग पुलिस को फोन कर मदद मांगी। जिस पर उप निरीक्षक सुरेंद्र कुमार यादव हमराही और महिला कांस्टेबलों के साथ मौके पर पहुंच गए और वन कर्मियों को सुरक्षित निकाला। वन रक्षक रवींद्र कुमार ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है।
बिंदकी रेंजर शशिकांत पांडेय ने बताया वन विभाग के नाम राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 1 रकबा 440.0800 हेक्टेयर दर्ज है। प्रशासन से यहां रह रहे लगभग सौ परिवारों को नोटिस दिया जा चुका है। मानवीय दृष्टि से वन विभाग की जमीन पर इनको अस्थायी रूप से रहने और मवेशी पालने के लिए रोका नहीं गया है, लेकिन स्थायी निर्माण करने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद इन लोगों ने वन कर्मियों को मारने व सरकारी काम में बाधा डालने तथा स्थायी निर्माण करने की शिकायत लिखित तौर पर जिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी देवमई को भेज रहा हूं। अभी तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
यमुना के किनारे बसे फतेहपुर और बांदा जनपद के गांव से यहां पर इनके पूर्वज आए थे। यहां पर कच्चे मकान व झोपड़ी डालकर रहते दो पीढ़ियां बीत चुकी हैं। दो पीढ़ियों से मतदान भी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रकाश को आवास मिला है। जहां वन विभाग निर्माण स्थल को वन विभाग का बता रहा है। वही प्रकाश ने लगभग 70 साल से उसी के बगल में अपनी झोपड़ी, टीनशेड कच्चा मकान होना बताया हैं।
प्रशासनिक महकमे की लापरवाही के चलते वन विभाग की अच्छी खासी जमीनों पर कब्जा हो चुका है। जिसे खाली कराने में वन विभाग के पसीने छूट रहे हैं। बड़े पैमाने पर जनपद की खागा, बिंदकी और सदर तीनों तहसीलो में वन विभाग की जमीन पर आम लोगों या तो अपना आशियाना बना लिया है या फिर उनमें अपनी खेती कर रहे हैं। वन विभाग को अपनी ही जमीनें खाली कराने में आमजन के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वन विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले के 56 गांवों में तीन हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन ग्रामीणों के अवैध कब्जो में फंसी पड़ी है। इन कब्जों के पीछे मुख्य कारण प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही रही है। वन विभाग की मानें तो सन 1952 से अब तक प्रशासन ने वन विभाग की जमीनों का अलंबरदार नहीं किया बल्कि कई जमीनों का प्रशासन ने बिना किसी अधिकार के ग्रामीणों को पट्टा भी कर दिया। अब जब उच्च न्यायालय और मुख्यमंत्री ने इन जमीनों को खाली कराने का फरमान जारी किया है तो वन विभाग को मौके पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उप प्रभारी वन अधिकारी प्रसिद्ध नारायण राय ने बताया कि जमीनों को खाली कराने के लिए अभियान चलाया गया है लेकिन मौके पर हालाल यह हैं कि जिन गांवो में कागजों में वन विभाग की सौ एकड़ जमीन है, वहां मौके पर हमें बमुश्किल साठ से सत्तर एकड़ जमीन ही मिल पा रही है। बाकी जमीनों का या तो पता नहीं चल रहा या उनमें कब्जा हो गया है।
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