पकड़े जाएंगे गुनहगार, पुरानी खतौनी बनेगी आधार
फतेहपुर: चकबंदी अथवा आनलाइन खतौनी के दौरान कागजी खेल कर सरकारी व सुरक्षित जमीनों को भूमिधरी बनाने वाले गुनहगार अब न सिर्फ पकड़े जाएंगे, बल्कि प्रशासन ऐसे लोगों से जमीन वापस लेकर पुरानी स्थिति बहाल करेगा। जिला प्रशासन ने लेखपालों के जरिए ऐसे मामलों को पकड़ने का ताना-बाना तैयार कर लिया है। मौजूदा खतौनी भले ही भूमिधरी की है, लेकिन उसका सत्यापन 1359 फसली से करते हुए यह तय होगा कि वर्तमान में जमीन जिसके पास है क्या वह उस भूमि का कानूनन मालिक है या नहीं। प्रशासन के इस कदम से हड़कंप मच गया है।
वर्ष 1998 तक हस्तलिखित खतौनी चलती थी, लेकिन वर्ष 1999 में इन्हें आनलाइन करने के लिए फीडिग की गयी थी। फीडिग के दौरान भारी पैमाने में खेल कर लोगों ने ग्राम समाज, सरकारी भूमि, सुरक्षित जमीनों पर भी अपना नाम दर्ज कराते हुए इन्हें भूमिधरी बना लिया। इसी तरह प्रत्येक गांव में 20 से 25 वर्ष में होने वाली चकबंदी के दौरान दस्तावेजी हेरफेर करके किसानों की जमीनें सड़क किनारे कर दी गयी। जबकि राजस्व नियमों के तहत सड़क के किनारे की जमीनें सुरक्षित खाते या फिर ग्राम समाज के हक में होती है। इन्हें भूमिधर नहीं बनाया जा सकता, लेकिन चकबंदी दौरान चतुर किसानों ने अपनी भूमिधर जमीनों के बदले इन सुरक्षित नंबरों और गाटों की भूमि हथिया ली। मौजूदा समय में ऐसी ही जमीनों की सौदेबाजी कर लोग मुनाफा कमा रहे हैं। अब प्रशासन ने इसकी पोल खोलने की योजना बनाते हुए गांव-गांव तैनात राजस्व लेखपालों को जिम्मेदारी दी है कि वह गांव की आधार खतौनी से मौजूदा खतौनियों का मिलान कर फ्राड वाली जमीनों को चिन्हित करें। ताकि इनकी सीधे सुनवाई करके खारिज करते हुए पुन: सुरक्षित खाते या ग्राम सभा में दर्ज किया जा सके। श्रेणी-3 वाली भूमिधर जमीनें भी होगी वापस
बता दें कि वर्ष 2006 तक सरकार गरीब किसानों को कृषि पट्टे के रूप में खेती किसानी के लिए जमीनें देती थी। 2007 में इस तरह की सभी जमीनों को खारिज कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी जिले में बहुतायत किसान ऐसे हैं, जिन्होंने श्रेणी-3 की जमीनों को भूमिधर बना लिया है। प्रशासन ऐसी जमीनों को भी वापस लेने की बात अपने एजेंडे में रखी है, अगर जमीनों की बिक्री भी हो चुकी है तो भी यह जमीनें क्रेता से वापस ली जाएंगी।
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जिला अधिकारी संजीव सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ ग्राम समाज और सुरक्षित खातों की जमीनों को बचाना है। इसके लिए अभियान चलाने जा रहे हैं। दस्तावेजी हेरफेर करने वाले लोगों का नाम भूमाफिया में दर्ज किया जाएगा और उनसे जमीन वापस ली जाएगी। इस अभियान को पूरा करने के लिए तीनों तहसीलों के लेखपालों को लगाया गया है। लेखपाल गड़बड़ी न कर पाएं इसके लिए आख्या की क्रास चेंकिग की व्यवस्था भी बनाई गयी है।
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