उन्नाव कांडः सीबीआई के बुलावे पर जिले से आठ लोग लखनऊ पहुंचे
उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के मामले में सीबीआई ने मंगलवार सुबह अचानक ट्रक मालिक समेत आठ लोगों को जिले से लखनऊ तलब कर लिया। सभी लोग आनन फानन में रवाना हो गए। ट्रक मालिक को तीन दिन से सुबह बुलाया जा रहा है और रात को छोड़ा जाता है।
उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की कार का 29 जुलाई को ट्रक से हादसा हुआ था। ट्रक यहां शहर के पाल नगर निवासी देवेंद्र किशोर पाल का है। देवेंद्र किशोर प्रसपा जिला महासचिव नंद किशोर उर्फ नंदू पाल के छोटे भाई हैं। सीबीआई ने रविवार को ट्रक मालिक को लखनऊ बुलाया था। इधर, सीबीआई की दूसरी टीम ने ट्रक मालिक के पैतृक आवास (ललौली कस्बे) व शहर में नंदू पाल व देवेंद्र पाल के मकान, चालक आशीष पाल के घरों में छानबीन की थी। चालक के घर में सोमवार को भी सीबीआई तीन घंटे तक डेरा डाले रही।
अब सीबीआई ने जांच और पूछताछ के लिए मंगलवार को ट्रक मालिक के साथ आठ लोगों को लखनऊ तलब किया। इनमें ट्रक मालिक देवेंद्र पाल, उनके समधी लाला पाल (निवासी पाल नगर), रायबरेली के लालगंज निवासी दिलीप कुमार पाल (देवेंद्र का छोटा भाई), देवेंद्र किशोर का कर्मचारी अरविंद यादव (निवासी बिंदकी), ललौली थानाक्षेत्र के ओती गांव के मजरा खबरा निवासी ट्रक चालक आशीष पाल के पिता सूरज पाल, भाई पंकज पाल, देवेंद्र किशोर के दूसरे ट्रक के चालक राजेंद्र व खलासी नीरज (निवासी समसपुर ओती थाना ललौली) को बुलाया गया है।
यह लोग सीबीआई कार्यालय हजरतगंज के लिए सुबह ही जिले से रवाना हो गए। शाम तक परिवार को लौटने की कोई खबर नहीं मिली। यह लोग घटनाक्रम के दौरान कहीं न कहीं से जुड़े बताए जा रहे हैं।
बता दें कि ट्रक मालिक देवेंद्र पाल घटना के दिन समधी और छोटे भाई दिलीप के साथ मौके पर पहुंचे थे। इसी तरह से चालक से मिलने उसके पिता और भाई गए थे। देवेंद्र के दूसरे ट्रक के चालक राजेंद्र व नीरज की लोकेशन लालगंज के दुसड़का ईंट भट्ठे की थी। इनके मोबाइल फोन से चालक आशीष पाल से संपर्क हुआ था। सभी एक दूसरे से जुड़े हैं। बांदा के खलासी मोहन के पिता और भाई भी बुलाए गए हैं।
बिंदकी का अरविंद ट्रक मालिक का कामकाज देखता है। अरविंद बांदा के लांबा खदान में मौरंग लोडिंग कराने गया था। इधर, प्रसपा नेता नंदू पाल ने बताया कि भाई देवेंद्र सोमवार रात साढ़े 11 बजे घर लौटे थे। उनसे सीबीआई ने कुलदीप सेंगर और उनसे जुड़े कई लोगों के नाम के बारे में पूछताछ की है। एक्सीडेंट के बारे में भी घुमा-घुमा कर कई बार पूछताछ की गई है। तीन दिन से देर रात भाई आता है और सुबह लखनऊ बुला लिया जाता है। पता नहीं यह कब तक चलेगा, वह तो पूछताछ में सीबीआई का पूरा सहयोग कर रहे हैं।
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