एनजीटी से जलधारा में हुआ खनन छिपाया था
फतेहपुर। एनजीटी दिल्ली में तलब हुए डीएम और खनन अधिकारी जवाब दाखिल करने के बाद वापस आ गए हैं। एनजीटी ने अधिकारियों को जलधारा से खनन किए जाने की मांगी आख्या को छिपाने के आरोप में तलब किया था। मामला पूर्व में तैनात रहे अधिकारियों के कार्यकाल का है। एनजीटी को अधिकारियों ने गोकन पट्टा निरस्त किए जाने की रिपोर्ट सौंपी है।
जिले में ई-टेंडरिंग से आवंटित खदानों में सबसे पहला यमुना मौरंग घाट 2018 में चालू हुआ था। गोकन मौरंग घाट में मौरंग न होने के कारण जलधारा से खनन होने की शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में की गई थी। शिकायत पर डीएम व खनन अधिकारी से एनजीटी ने जवाब मांगा था। तत्कालीन अधिकारियों ने जवाब नहीं भेजा। इसके पीछे क्या वजह रही यह जांच का विषय है। गोकन मौरंग घाट कई महीने संचालित हुआ था। बाद में घाट संचालक ने सरेंडर कर दिया था, जिससे मौरंग खदान पट्टा निरस्त हो गया। डीएम संजीव सिंह और खनन अधिकारी मिथिलेश पांडेय की ओर से पट्टे के निरस्त होने की रिपोर्ट दी गई है। एनजीटी अब तत्कालीन डीएम आंजनेय सिंह और खनन अधिकारी सौरभ गुप्ता से प्रकरण में जवाब मांग सकती है।
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